Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya – Part 14

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iloveall 2017-02-14 Comments

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पर कहानी में ट्विस्ट तब आया जब मैंने अनिल की पत्नी को पहली बार देखा। हॉल मैं जैसे ही वह दाखिल हुई की मेरी आँखें उस पर गड़ी की गड़ी रह गयीं। अनीता ऐसी मस्त लग रही थी जैसी की मैंने अपने सपने में किसी सेक्सी औरत की कल्पना की थी। मेरे गहन में एक ऐसी सेक्सी औरत की मूरत थी जिसके होंठ पहले हुए मद मस्त गुलाब की पंखुड़ियों की तरह लाल हों और जिसकी चाल से उसके नितम्ब ऐसे थिरकते हों जैसे कोई हाथिनी चल रही हो। जब उसके पति अनिल ने अपनी पत्नी अनीता की मुझसे पहचान कराई तो उसने अपना हाथ लंबाया जिसे अपने हाथों में लेते ही मेरे पुरे बदन में जैसे आग लग गयी।

अक्सर भारतीय पत्नियां कोई पुरुष से पहचान कराने पर नमस्कार करके अपना पिंड छुड़ा लेती हैं। पर मुझे लगा जैसे अनीता मेरा स्पर्श करने के लिए जितना मैं आतुर था उतनी ही वह भी थी। शायद इस लिए भी हो क्यों की उस समय उसका पति मेरी बीबी को इतनी बेशर्मी से घूर रहा था जिससे की उसके पति की नियत साफ़ साफ़ नजर आ रही थी। उधर मेरी पत्नी नीना भी हंस हंस कर उसकी बातों का लुत्फ़ उठा रही थी और शायद अनजाने में ही अनिल को प्रोत्साहित कर रही थी।

मुझे क्यों ऐसे लग रहा था की जैसे अनीता की आँखें मुझे देख अनायास ही नशीली हो रही थी। वह मुझे इशारा कर रही थी की मैं उसके करीब जाऊं और उससे कुछ बात करूँ। मैं अपने आपको रोक नहीं पाया। मुझे उसे अपनी बाँहोँ में भरनेकी ऐसी ललक लग गयी की मैं अनीता के बारे में सोचते सोचते बेचैन हो गया। तब मुझे अनिल की मेरी बीबी नीना को लुभाने वाली योजना की सफलता में ही मेरी मंज़िल नजर आयी। जाहिर है मैं मेरी बीबी को अनिल के करीब लाने में अनिल का सहायक बन गया।

जब मैंने देखा की अनिल भी वही सोच रहा था जो मैं सोच रहा था तब तो मुझे मेरी मंझिल करीब ही नजर आने लगी। अनिल को भी मेरी बीबी इतनी भा गयी की वह उसके करीब आने की लिए अपनी बीबी अनीता को मेरे करीब लाने के लिए लालायित हो गया। मैं उसे मेरी बीबी का प्रलोभन दे रहा था और वह मुझे अपनी बीबी का। मेरे और अनिल के एकजुट होने पर भी रास्ता मात्र आधा ही आसान हुआ था। प्रश्न था की बीबियों का अवरोध कैसे तोड़ा जाय। बीबियों को कैसे हमारी योजना में शामिल किया जाय।

तो मेरे मन में यह विचार आया की दोनों बीबियों को एकसाथ मनाना बड़ा मुश्किल काम था। बीबियाँ वैसे ही बड़ी मालिकाना अथवा स्वामिगत होती हैं। वह आसानी से अपने पति को किसी गैर औरत की बाहोँ में देख नहीं सकती। खैर मात्र बीबियों के लिए ही यह कहना भी ठीक नहीं है, क्योंकि पति भी तो ऐसे ही होते हैं। पर हमारे बारे में यह था की मुझे पूरा भरोसा था की हम दोनों पति अपनी पत्नी को एक दूसरे के साथ शारीरिक रूप से सम्भोग करवाने के लिए मानसिक रूप से तैयार हो चुके थे। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है..

उसमें भी मैं तो वैसे ही अनिल को मेरी बीबी नीना को ललचा ने की कोशिश करते देख बड़ा उत्तेजित हो रहा था। मैं ऐसा मानता था की एक मर्द एक स्त्री को पूरी तरह जातीय सम्भोग में संतुष्ट नहीं कर पाता है। साधारणतः मर्द जल्दी स्खलित हो जाता है, पर स्त्री एक साथ कई बार स्खलित हो जाने के उपरान्त भी सम्भोग का आनंद लेने के लिए उत्सुक रहती है। उसे जातीय सम्भोग में थकाने के लिए एक मर्द पर्याप्त नहीं। एक स्त्री दो मर्दों को सहज ही संतुष्ट कर सकती है और दो मर्द ही उसको पूरी तरह से संतुष्ट कर सकते हैं।

यह बात शादी के कुछ सालों के बाद तो सटीक साबित होती है। मैं तो स्वयं यह चाह रहा था की मेरी प्यारी खूबसूरत बीबी एक बार हमारे मन पसंद गैर मर्द से जातीय सम्भोग का आनंद ले। बल्कि मेरे मनकी ख्वाहिश थी के मैं ऐसे मर्द के साथ मिलकर मेरी सुन्दर पतिव्रता बीबी को दो मर्दों से एक साथ उत्छ्रुन्खल चुदाई के आनंद का अनुभव कराऊँ। मैं स्वयं उस बात का आनंद लेना चाहता था और मैं अपनी बीबी को भी एक गैर मर्द से चुदाई का आनंद मिले यह अनुभव उसे करवाने के लिए बड़ा ही उत्सुक था। अनिल की पत्नी अनीता मुझे एक बोनस के रूप में मिल सकती थी वह सोचकर मेरे मन में अजीब सी थनगनाहट होने लगी। तब भला मैं कैसे रुकता?

जैसे की इस कहानी की श्रृंखला के पूर्वार्ध में दर्शाया गया था, मेरी सरल और निष्ठावान (जिसे मैं नीरस समझता था वह) सुन्दर सेक्सी पत्नी नीना, मेरे और अनिल के चालाकी भरे कारनामों से हमारे झांसे में आ ही गयी। होली की उस रात को हम दोनों ने उसे उतना उकसाया की उसे जाने अनजाने हम दोनों की बाहों में आना ही पड़ा। यह सच है की हमने उसे कूटनीति अपना कर पहले ललचाया और अनिल के व्यक्तित्व द्वारा प्रभावित किया।

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