Rahul Ka Badla – Part 2

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Deep punjabi 2016-08-05 Comments

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Hindi Sex Stories

अब आगे की कहानी – उस दिन से आशा के मन में उस रोहित के प्रति नफरत सी हो गयी। उसने घर में तो किसी को कुछ नही बताया पर अब जहाँ भी रोहित मिलता, उससे किनारा कर लेती। पहले कई बार रोहित के साथ बाज़ार भी चली जाती थी। पर अब कभी भी बाज़ार जाती या तो राहुल के पापा के साथ या फेर अकेली।

रोहित को हर पल यही डर रहता के उसकी चोरी पकड़ी न जाये। उसके इतना हब्शी और कामुक होने का कारण उसके घर का अपना माहौल था। वो कई बार अपनी माँ को चुदते, नहाते, कपड़े बदलते देख चूका था।

दिन बीतते गए रोहित दिन भर सुस्त रहने लगा।

राहुल – क्या हुआ बे साले दिन ब दिन सुस्त रहता है। पहले जेसी मस्ती नही करता। क्या दिक्कत है तेरे को बता न

रोहित – कुछ भी नही यार बस ऐसे ही फालतू की टेंशन थी थोड़ी।

राहुल — बोल न हुआ क्या है।

रोहित – बता देता हूँ पर वादा कर बुरा नही मानेगा और मुझसे बोलचाल बन्द नही करेगा।

राहल – क्या मतलब मैं कुछ समझ नही,

रोहित – देख यर तू तो मुझे भली भांति जानता है के मेरी कमज़ोरी लड़की है, जहाँ दिखी नही मेरी चड्डी गीली हुई नही।

(लड़ाई के डर से फेर भी आधी बात बताई)

पिछले रविवार तेरे घर गया था। तब तू घर पे नही था। तू ओर मामा जी सैर को गए थे। घर पे अकेली मामी थी। मैंने बाहर से ही आवाज़ दी कोई नही बोला, जब अंदर गया तो मामी नहाकर कपड़े पहन रही थी। मैंने उन्हें नंगा देख लिया और कामवासना में अँधा होकर छिपकर ही मुठ मारने लगा। जब रस्खलित हुआ तो मामी ने मुझे देख लिया और डांटा भी था। पता नही उन्होंने तुझे या मामा जी को बताया या नही पर अब मैं शर्म के मारे उनके सामने भी नही जा सकता। तू बता मैं क्या करू अब ? बस यही मेरे उदास होने की वजह है।

उसकी बात सुनकर राहुल का भी खून खौल उठा, जो के स्वभाविक भी था। क्योंके उसकी जगह आपमें कोई भी होता, ये बात बर्दाश्त नही करता।

उसने रोहित को उस समय कहा तो कुछ नही पर दिल में अपने इस अपमान का बदला लेने की कसम खा ली, और चेहरे पे स्माइल लाते हुए कहा,” चल कोई बात नही यार होता रहता है इतना तो, टेंसन न लेना अब किसी भी बात की।

रोहित को लगा के उसकी गलती माफ़ करदी गयी है । धीरे धीरे दिन बीत ते गए। रोहित बात को भूल गया पर राहुल के बदले का ज़ख़्म अभी भी ताज़ा था। वो बस एक मौके की तलाश में था, कब अपने मन की भड़ास निकाले।

इस दौरान स्कूल की छुटिया हुई। तो इस बार राहुल अपनी बुआ के यहां रहने आ गया। उसकी बुआ मीरा की उम्र भी 40 के करीब, शरीर थोड़ा सा भारी, रंग गोरा और साडी ब्लाऊज़ पहनती थी। वो थोड़ा खुले स्वभाव की स्त्री थी। मतलब जिन बातो को आम स्त्रियां बोलने से भी झिझकती है, मीरा फटाक से बोल देती थी।

राहुल और रोहित दोनों अपने माँ बाप की एकलौती सन्ताने थी।

इन दिनों दशहरे का त्यौहार नज़दीक आ रहा था। तो उसकी खूब तयारिया हो रही थी। एक दिन रोहित और उसके पापा को घर के किस काम के लिए एक दिन के लिए बाहर जाना पड़ा। पीछे राहुल और मीरा दोनों बुआ भतीजा घर पर रह गए।

राहुल उन दोनों बाप बेटे को स्टेशन तक छोड़कर आया और आते वक़्त मेडिकल स्टोर से कुछ नींद की गोलिया ले आया। शाम को उसके घर पे आते ही उसकी बुआ ने उसे खाना परोसा।

राहुल – बुआ नही आज मेरे साथ रोहित नही है सो आप भी मेरे साथ बैठ कर खाना खाइये न।

बुआ – नही बेटा तुम खालो, मैं बाद में सब काम काज निपटा कर फ्री होकर खाऊँगी। ऐसे जल्दबाज़ी में मुझसे नही खाया जायेगा।

राहुल — तो ठीक है फेर मैं भी आपके साथ ही खाऊँगा ले जाओ वापिस खाना।

बुआ ने काफी मिन्नते की के खालो, पर राहुल नही माना और उसे अपने भतीजे की ज़िद के आगे झुकना पड़ा।

बुआ — चलो ऐसे करो मैं थोड़ी घर की सफाई कर लू। फेर इकठे बैठ कर खाना खाएंगे। तब तक तुम रोहित के कमरे में जाकर आराम करलो और जाते जाते ये खाना रसोई में ढक कर जाना।

राहुल ने उसकी आज्ञा का पालन किया।

राहुल को भूख तो बहुत लगी थी। पर बदले की आग ने उसे खाना खाने नही दिया।

थोड़ी देर बाद मीरा रोहित के कमरे में पसीने से भीगी हुई आई और जिस बेड पे राहुल आराम कर रहा था। उसी पे थोड़ा सा हटकर राहुल के साथ ही लेट गयी। ऊपर पंखा चल रहा था, थोड़ा थकी होने की वजह से लेटते ही गहरी नींद के आगोश में चली गयी। इधर जब राहुल ने लेटे लेटे साइड बदली तो उसका हाथ बुआ की चुचियो पे आ टिका।

अपने हाथो के निचे मुलायम मुलायम चीज़ महसूस करके राहुल की भी नींद टूट गयी और उठ कर बैठ गया और एक अजीब सी ख़ुशी महसूस करके खुद ही मुस्कुराया। जैसे भगवान ने उसकी तपस्या मंजूर करली हो। उसने कंधे से पकड़ कर बुआ को हिलाया और बुआ नींद में इतना डूबी थी के एक दो आवाजे उसे सुनाई न दी।

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