Bhoot To Chala Gaya – Part 4

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iloveall 2017-05-05 Comments

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राज ने समीर का हाथ अपने हाथों में थामा और बोले, “देखो, हम तुम्हें अपना समझते हैं। तुम नीना का दफ्तर में बहुत ध्यान रखते हो। मैं चाहता हूँ की घर में भी तुम नीना का ध्यान रखो। जहाँ तक रोज खाने की बात है तो चलो तुम एक काम करना, जब मौक़ा मिले तुम सब्जी, राशन बगैर ले आना। अब तो ठीक है?”

समीर बेचारा क्या बोलता? उसने मुंडी हिला कर हामी भरदी और उठकर खड़ा हुआ और बोला की वह जाना चाहता है। मेरे पति समीर को सीढ़ी से उतर कर नीचे तक छोड़ने गए। तब मैंने मेरे पति को समीर से कहते हुए सुना की, “समीर, देखो, हमारे कोई संतान नहीं है। नीना अकेले में बड़ी परेशान हो जाती है। तुम आ जाओगे तो हमें नयी जिंदगी मिलेगी।” इसी तरह बातें करते हुए दोनों बाहर निकले। राज का आखरी में ऐसी बात कहने का क्या मतलब था वह मैं समझ नहीं पायी।

समीर के जाने के बाद मेरे पति राज ने मुझसे कहा, “देखा जानू, आज की शाम कितनी आनंद वाली रही? मुझे सच सच बताना, क्या तुम्हे मज़ा नहीं आया? क्या समीर में वह परिवर्तन नहीं आया जो तुम चाहती थी?”

मैंने परे पति राज की और देखा और बिना झिझक बोली, “हाँ राज, मुझे बहोत मजा आया। ख़ास तौर से समीर को इतना तनाव मुक्त और स्वच्छंद देखकर मुझे बहुत अच्छा लगा। तुमने वास्तव में ही कुछ जादू कर दिया ऐसा लगता है।”

तब राज ने कहा, “जादू मैंने नहीं, तुमने किया। पहली बात यह की तुमने ऐसे कपडे पहने जिससे समीर को ऐसा अंदेशा हुआ की तुम्हें तुम्हारे सेक्सी बदन को दिखाने में कोई आपत्ति नहीं है। अगर वह तुम्हारे खुले हुए बदन को झांकेगा तो तुम बुरा नहीं मानोगी। दूसरी बात। तुमने समीर के पास जा कर जो अंगभंगिमा की और उसको अपने कूल्हे दिखाए उससे उसकी प्यासी आँखों को थोड़ा सुकून मिला।

तीसरी बात, जब मैंने तुम्हें समीर के पास जाकर समीर को गालों पर चुम्बन करने को कहा और तुमने उसे एक गहरा चुम्बन किया तो उसे लगा की अब तुम उससे काफी खुल गयी हो और अब पहले की तरह तुम बुरा नहीं मानोगी। और उसने क्या कहा? उसने कहा की उसको लग रहा था की मुंबई में भी उसकी कोई फॅमिली है। यह एक बहुत बड़ी बात है।”

राज तब थोड़ा रुक गए और उन्होंने मेरी और प्रश्नात्मक दृष्टि से देखा। तब मैंने कहा, “हाँ, तुम सही कह रहे हो। समीर को आज हमारे यहां बहुत अच्छा लगा। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

“राज ने कहा,तुम्हे इतना तनाव मुक्त देख मुझे बहुत अच्छा लगा। एक बात समझो। सब पुरुष एक से नहीं होते। समीर दूसरों से अलग है। तुमने समीर को चुम्बन किया, समीर ने तुम्हें बाहों में जकड़ा, तो कोन सा आस्मां टूट पड़ा? क्या हम सब ने एन्जॉय नहीं किया? मैंने सबसे ज्यादा एन्जॉय किया। याद रखो, ‘भूत तो चला गया, भविष्य मात्र आश है, तुम्हारा वर्तमान है मौज से जिया करो” मेरे पति की समझ की मैं कायल हो गयी।

राज एकदम उत्तेजित हो गए थे। उनका लण्ड तो फौलाद की तरह अकड़ा हुआ था। तो मैं भी तो काफी गरम हो गयी थी। मेरा ह्रदय धमनी की तरह धड़क रहा था। समीर की बाहों में लिपटना और राज के ऐसे उकसाने वाले बयानों से मेरी चूत में से तो पानी का जैसे फव्वारा ही छूट रहा था। राज ने मुझे अपनी बाँहों में लिया और उठाकर मुझे पलंग पर लिटा दिया। उस रात राज ने और मैंने खूब जमके सेक्स किया जैसा पता नहीं हमने इसके पहले कब किया होगा।

ऑफिस में समीर अपने फिर वही पुराने अंदाज में आगये थे। सब कर्मचारी समीर के परिवर्तन से बड़े खुश थे। मुझे पता था की समीर मुझसे करीबियां बनाने के लिए बड़े ही आतुर थे। वहाँ तक तो ठीक था। पर अब मैं डर रही थी की कहीं मैं कोइ ऐसी वैसी परिस्थिति में न फंस जाऊं।

मुझे समझ नहीं आरहा था की कैसे मैं अपनी मर्यादा में भी रह सकूँ और समीर को भी बुरा न लगे। इसके लिए मैंने यही सोचा की समीर से अपनी दोस्ती तो बढ़ाऊँ पर उससे फिर भी एक अंतर रखूं जिससे उसके मनमें मेरे लिए एक सम्मान हो और वह मेरे बारे में उलटा पुल्टा सोचने से कतराए।

समीर के लिए मैं घरसे खाना बना कर लाने लगी। ऑफिस में समीर और मैंने साथ में खाना शुरू किया। कई बार ऐसा हुआ की समीर ने मुझे दोस्ती जताते हुए छुआ जैसे अकस्मात से ही हुआ हो। कई बार समीर मेरे पास से संकड़ी जगह में से मेरे स्तनों को छू कर निकल गए।

मुझे अपना फीडबैक देने के लिए कृपया कहानी को ‘लाइक’ जरुर करें। ताकि कहानियों का ये दोर देसी कहानी पर आपके लिए यूँ ही चलता रहे।

राज ने मुझे पहले से ही कह रखा था की ऐसा तो होगा और मैं उसके लिए तैयार भी हो चली थी। मैं भली भांति जानती थी की समीर मुझे छूने के लिए लालायित रहते थे। मैं उनकी ऐसी छोटी बड़ी हरकतों को नजर अंदाज करने लगी। मैंने सोचा अगर इससे उनको ख़ुशी मिलती है तो ठीक है, जबतक ज्यादा कुछ नहीं होता तब तक ठीक है।

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