Maya Ki Chut Ne Lagaya Chodne Ka Chaska

Click to this video!
Picashow 2015-04-21 Comments

This story is part of a series:

पर मेरे मन को एक गजब की शांति मिल गयी. मेंरी चीखे अब शांत हो गयी…. यारो आज में सेक्स करते हुए दो बार जड़ा था… एक शांति का एह्स्स्सास. कमरे में भी शांति हो गयी और बाथरूम में नल से पानी की आवाज़ आ रही थी. वो अपने आप को सायद साफ कर रही थी. बिखरे हुए बिस्तर पे में एक घायल सैनिक की तरह पड़ा था. मानो आज मेरा रेप हुआ था.

में शांति से बिस्तर पर पड़ा था और माया बाथरम में मुह साफ़ कर रही थी के तभी मेन दरवाजे पे जोर से दस्तक हुई. मेरी तो गांड फट गयी, मे जट उठा और अपने कपडे ढूंढ़ने लगा और माया को दबी आवाज़ में कहा.

में: माया मर गए कोई आ गया लगता हे, देखो कोई दरवाजे पर दस्तक दे रहा हे…. माया जल्दी से नेपकिन से अपना चेहरा साफ़ करती हुई बहार निकली, वो भी डरी हुई थी की आखिर कोन आ गया!!! वो मुझे बाथरूम में छुपाकर डर के माँरे कापते हुए दरवाजे पे गयी. दरवाजा खोला तो उसकी सहेली सरोज थी जो बिलकुल हमारे मकान से सटे मकान में रहती हे. माया को दरवाजे से हटाते हुए वो जबरन अन्दर घुस आई और उसने माया को नजदीक बुलाकर कहा

सरोज: (दबी आवाज में) माया मेरे कमरे से सटी तुमारी खिड़की से मुझे अजीब-अजीब सी आवाजे सुनाई दी तो में भाग कर तुजे बताने आई हु की तुमारे कमरे की आवाज़ बहार तक आ रही हे कोई सुन लेगा. उसने आंख मरते हुए कहा..

सरोज: क्यों क्या हो रहा हे मायादेवी????!! मैंने ऐसी तड़पनेवाली कसकती आवाज़ इतने साल में तुमारे कमरे से कभी नहीं सुनी. क्या हे मेरी जान???? माया हडबडाते हुए…

माया: न न नही ऐसा तो कुछ भी नहीं…. घर में कोई है ही नहीं तो आवाज़ कैसी..???!!! त त तू जा…..ऐसा कुछभी नहीं है. सरोज ने मेन दरवाजा बन्ध किया और जबरन माया के कमरे की और आ गयी. वो उसकी बहोत अच्छी सहेली थी. वो दोनों अक्सर छत पे दोनों मकान के बिच की दिवार के पास खड़ी रहकर घंटो तक फुसफुसाती रहती..दोनो बहोत ही अच्छी सहेलिया थी.

सरोज: ओह्ह्ह्ह तो मायादेवी कोई नहीं हे तो फिर आप सजधज के क्या कर रही थी??? खिलाडियो से खेल??? अगर कुछ नहीं ने तो तेरा रंग क्यों उतरा हुआ हे. और ये तेरे गाल पे क्या चिपका हे??? उसने उसके गालपे चिपके मेरे वीर्य को अपनी ऊँगली पे लिया और उसे सूंघने लगी… और वो कमरे की अन्दर की और बढ़ने लगी. माया ने उसका हाथ पकड़ा और चिढ़ते हुए……

माया: सरू प्लीज कुछ नहीं हे तू बेकार में मुजपे शक कर रही हो, और मेरे गालो पे दूध की मलाई चिपकी थी जो अभी दूध पीते हुए लगी होगी, में साबुन से मुह धो रही थी तो साबुन आँखों में जाने से मेरी आवाजे आ रही होगी मेरी माँ!!!!

सरोज: अच्छा तुजे पता हे ना में बड़ी चुदक्कड हु, मेने कहीयो के पानी छुड़ा दिए हे!! समजी… मुझे उल्लू न बना. बता अन्दर कौन हे, बताती हे या में अन्दर जा के उसकी पिटाई कर के पुरे मोहल्ला जमा करदू. अभी तो केवल शाम के ७.३० बजे हे महारानी.

में अन्दर से सब सुन रहा था और मेरी तो गांड फट रही थी और मेरा दिल डर के मरे जोर-जोर से फड़क रहा था. वो लगभग हमारे कमरे में आ चुकी थी. वो कमरे की हालत देखकर बोल उठी..
सरोज: साली जूठी ये कैसी बू आ रही हे और यह तेरे बिस्तर की हालत देख कोई भी कह सकता हे की यहाँ तू अकेली नहीं…, बोल कोन था तेरे साथ…???? बोलदे वरना मुझसे बुरा कोई ना होगा.

माया: ओह सरू कोई भी तो नहीं… तू यार खामखा मुजपे शक कर रही हे.. अगर कोई होता तो पगली में तुजे न बतानी, तुजसे मेरी कोई बात छिपी हे क्या??..

सरोज: साली तो ये तेरे गालो पे जो चिपका था और खडकी से सिसकिया सुनाई दी वो क्या भुत की थी? वो जोर से धमकी भरे शब्दों में बोली……. मेने मैंन दरवाजा बन्ध किया हे और में माया की खास सहेली हु और जो भी अन्दर छिपा हे वो मेहरबानी करके बहार आये. अगर मेने उससे ढूढ़ लिया तो बहोत बुरा होगा..

माया: सरू कोई नहीं यार मुजपे भरोशा नहीं क्या? वो बिचारी सरोज को गीड-गिडा रही थी. उससे हाथ जोड़कर मिन्नते कर रही थी. यार तू जा कुछ नहीं…

सरोज: तुम बहार आते हो या में अन्दर आऊ??? अगर पकडे गए तो तुमदोनो का हाल बुरा होगा ये लास्ट वार्निंग हे. माया ने उसके कान के पास जाकर कुछ कहा. तो और भी चिल्लाई.

सरोज: अच्छा तो ये बात हे आने दे भैया भाभी को.. यह सुनकर में जट से बहार निकला, में बरमूडा और टी शर्ट पहने हुए था.

में: नहीं प्लीज़ दीदी ऐसा मत करना, मैंने भी लाचारी से हाथ जोड़े..

सरोज: प्लीज़ के बच्चे, में तेरी दीदी नहीं साली हु समजा, मुझे दीदी कहा तो तेरा रेप कर भाईचोद बन जावुगी, इतना छोटा हे पर मेरी भोली सहेली को फसा दिया?!! साले १२-१३ साल से वो तड्पी हे पर भाई की इज्ज़त को देखते हुए कभी बहार नहीं गयी और साले तूने उसको फुसला के उसको ठोकने भी आ गया.. (में गभराया, मुझे बात बिगडती दिख रही थी).

Comments

Scroll To Top