Ek Ajnabi Hasina Se Mulakat Ho Gayi

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Deep punjabi 2017-07-05 Comments

वो — अब गुस्सा थूक भी दीजिये न कह तो दिया बस मूड खराब की वजह से गलती हो गयी। मुझे माफ़ कर दीजिए। मैं अपने किये पर बहुत शर्मिंदा हूँ। प्लीज़ मुझसे माफ़ करदो।

मैं — (गुस्से से) — क्यों अब क्या हो गया। अब कोनसी फ़ौज़ आपके पास होगी और वैसे भी आप मेरी वजह से डिस्टर्ब ही होंगी । सो कृपया आप मुझे भी माफ़ करे और अपने घर जाइये। मैं चला जाउगा अपने घर। साली इंसानियत नाम की चीज़ ही खत्म हो गयी है आप जैसे लोगो की वजह से, अब खडी क्यों हो जाइये न, क्यों अपना वक्त खराब कर रही हो। सो जाओ जाकर घर अपने।

गुस्से में मुझे पता ही नही चला उसे न जाने कितनी ही उलटी सीधी बाते बोल गया।

वो — मान भी जाइये न प्लीज़, एक बार घर तो चलिए न वहां जाकर जितना मर्ज़ी डांट लेना।

वैसे भी यहां कब तक खड़े रहोगे। ऊपर से ठंडी रात है। यहाँ आपकी कुल्फी जम जायेगी।

वो मुझे ऐसे मना रही थी के जैसे मेरी बीवी या गर्ल फ्रेंड हो।

उसकी आवाज़ में निवेेदन, मायूसी, पछताचाप साफ साफ दिखाई दे रहा था।

उसकी बात मानते हुए मैं उसकी गाडी में बैठ गया और उसके साथ उसके घर तक पहुँच गया।

अंदर जाकर उसने मुझे सोफे की तरफ इशारा करके बैठने को कहा।

परन्तु भीगा होने की वजह से मैंने खड़ा रहना ही उचित समझा।

मैं अभी भी इसी कशमश में था के इसको ऐसा क्या सूझा के पहले धक्के मार रही थी और अब मिन्नते कर रही है। इसी उलझनतानी में पता ही नही चला के कब वो मेरे लिए एक जेंट्स कुर्ता पायजामा और तौलिया लेकर मेरे सामने खड़ी थी।

वो — बाकी की बाते बाद में पहले ये लो कपड़े बदल लो, वरना सर्दी लग जायेगी और बीमार पड जाओगे।

मेरे ना ना करने के बावजूद भी उसने मुझे कपड़े दे दिये और बाथरूम की तरफ इशारा करके जल्दी वापिस आने को बोला।

मैं बाथरूम में भी यही सोचता रहा के एक अजनबी लड़की इतना अपनापण क्यों दिखा रही है।

उस वक़्त बड़े अजीब अजीब ख्याल मेरे दिमाग में आ रहे थे।

कई बार खुद ही अपने सवाल का जवाब देने लग जाता के यार फेर क्या हुआ उसने गुस्से में बोल दिया, इंसानियत भी एक चीज़ होती है और अब माफ़ी भी तो मांग रही है। मैं अपने कपड़े बदल कर वही अपने भीगे कपड़े सुखा कर उसके पास बाहर सोफे पे जाकर बैठ गया। तब तक वो टेबल पे गर्म चाय के दो कप, गरमा गर्म पकोड़े ट्रे में लेकर वही मेरा इंतज़ार कर रही थी।
मेरे सोफे पे बैठते ही उसने प्लेट, कप मेरी तरफ उठाकर आगे बढ़ाया और खुद दूसरा कप अपने होठो से लगा लिया। दो तीन मिनट तक चुपी छाई रही। जब हमने चाय पीली तब वो बोली हांजी अब दिल में जितनी भी भड़ास है निकाल लीजिये।

सबसे पहले एक बार फेर आपसे माफ़ी चाहती हूँ के शाम को जो भी हुआ। आज रात आप यहा रुक सकते हो। जब सुबह बारिश बन्द हो जाये अपने घर चले जाना।

वो दरअसल उस वक़्त मैं अपने पति से फोन पे झगड़ा करके हटी थी। जो के किसी कम्पनी में मैनेजर की पोस्ट पे तैनात है। एक हफ्ते से घर नही आये है। ऊपर से मेरी सासु माँ, मेरी नन्द के यहाँ चली गयी है। आप तो समझदार हो बिना परिवार के अकेली पत्नी कैसे रह सकती है ?

इसे मेरी मज़बूरी समझो या कुछ और मुझे कोई फर्क नही पड़ने वाला।

हाँ अकेली का दिल नही लग रहा था । सो सोचा आपको रात गुजारने के लिए छत मिल जायेगी और मुझे एक पार्टनर ।

उसकी दोगली बातो के अर्थ को मैं अच्छी तरह से समझ रहा था।

करीब आधा घण्टा बाते करने के बाद वो उठी और रसोई में खाना बनाने चली गई। बाद में हमने साथ में खाना खाया और बातो में पता चला के उसका नाम मीनाक्षी अरोड़ा है और वो यहां अपने पति और सासु माँ के साथ रहती है। उसकी शादी को डेढ़ साल हो गया है और अभी तक माँ नही बनी है, और वो एक हफ्ते से सेक्स की भूखी है। अब पूरी बात मेरी समझ में आ चुकी थी के उसे अपनी काम अग्नि शांत करने के लिये मेरा शिकार किया है।

सारा काम निपटाने के बाद उसने मुझे मेरा कमरा दिखाया, बातो बातो में मुझे याद आया के मेरे घर वाले मेरा रास्ता देख रहे होंगे। मैंने ऐसे ही उसे ऐसे बोल दिया खाना खा लिया अब मुझे जाना चाहिये घर वाले मेरी चिंता कर रहे होंगे। मेरी इस प्रतिकिर्या से जैसे उसके सारे अरमानो पे पानी फिर गया हो।

उसने अपना मोबाईल मेरी तरफ बढ़ाते हुए कहा,” ये लो फोन अपने घर पे फोन लगाकर बोल दो के बारिश की वजह से आज नही आ पाउँगा ! आज की रात किसी दोस्त के यहाँ रुका हुआ हूँ। सुबह बारिश के बन्द होते ही आ जाऊंगा। एक बात तो पक्की हो गयी थी के वो मुझे जाने नही देना चाहती। मैंने उसके मोबाईल से घर पे फोन कर दिया के किसी दोस्त के घर पे रुका हूँ सुबह बारिश रुकते ही घर आ जाउगा।‌‌‌‌‌

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