Namrata Ki Kahani

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rangbaaz 2015-03-20 Comments

Namrata Ki Kahani

इस कहानी के सभी पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं.

अदिति और नम्रता एक दूसरे की पक्की सहेलियां थी. अपनी समस्याएँ, खुशियाँ, सुख-दुःख एक दूसरे को बताती थीं. यहाँ तक की बायफ्रेंड के साथ कहाँ गयीं, उन्होंने उनके साथ क्या-क्या किया, किसको कैसा लगा भी- दोनों किसी से कुछ नहीं छुपाती थीं. दोनों एक कालेज में पढ़ती थी, और दोनों के घर भी पास-पास थे.

कुछ दिनों बाद नम्रता का अपने बायफ्रेंड विक्रांत से झगड़ा हो गया. उसे पता चला की विक्रांत का किसी और लड़की के साथ भी चक्कर चलता है. उससे अलग होने के बाद नम्रता बहुत उदास, उखड़ी-उखड़ी रहने लगी. बेचारी न ढंग से खा रही थी न पढ़ पा रही थी. अदिति ने उसे बहुत हिम्मत दी. उससे अपने घर खाना खिलाती, घुमती फिराती, उसका जी बहलाती. कुछ समय बाद नम्रता सामान्य होने लगी.

लेकिन अभी भी वो लड़कों से दूर रहती थी. उसका लम्बा कद, दुबला पतला आकर्षक फिगर, शफ्फाक गोरा रंग, मुलायम रेशमी लम्बे-लम्बे बाल, गुलाब से कोमल होट, बादाम सी बड़ी बड़ी काली आँखें थीं. इसके चलते कालेज में, गली मोहल्ले में उसे कितने लड़के लाइन मारते थे. वो अपने कालेज की सबसे सुन्दर लड़कियों में से थी, और वहां पर सौंदर्य प्रतियोगिता भी जीत चुकी थी. इधर अदिति बिलकुल सामान्य लड़की थी.

एक दिन नम्रता अदिति से मिलने शाम को उसके घर पुलिस लाईन्स आई. अदिति के पापा पुलिस में दरोगा थे. लेकिन उस वक़्त उसके मम्मी-पापा और बड़ा भाई कहीं गए हुए थे. नम्रता ने अदिति के घर का दरवाज़ा खटखटाया – वो अदिति को बिनाबताये आई थी. अदिति ने दरवाज़ा खोला. उसके चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं और वो अपने बालों को संभाल रही थी.

नम्रता को देखते ही अदिति ने चैन की सांस ली. “अरे तुम हो… बता कर नहीं आ सकती थीं? मेरी तो जान ही निकल गयी.”
“क्यूँ भाई, बिना बताये नहीं आ सकती तुमसे मिलने? कौन सा पहाड़ टूट गया? और इतनी घबरायी हुई क्यूँ हो?”
“अरे अन्दर तो आओ.. अभी बताती हूँ. ” अदिति ने नम्रता को अन्दर खींचा और दरवाज़ा अन्दर से बंद किया.
अदिति ने दबी आवाज़ में मुस्कुराते हुए बताया “मेरा बायफ्रेंड आया है, उसी के साथ बिज़ी थी.”
अब नम्रता भी मुस्कुराने लगी. “ओहो, तो ये बात है, हिरोइन अपने हीरो के साथ लगी पड़ी थी. लगता है अंकल-आंटी और मनु (अदिति का भाई) कहीं गए हुए हैं. मैं वापस जाऊं क्या?”
“अरे नहीं, मिलती तो जाओ” अदिति ने रोका.
“हाँ, क्यूँ नहीं, वैसे भी तुमने मुझे अभी तक नहीं बताया उसके बारे में” नम्रता ने शिकायत भरे लहज़े में बोला और उसके गाल पर हलकी सी चपत लगा दी.
अदिति ने उसे ड्राइंग रूम में बिठाया और अन्दर चली गयी. उसने उसे कहते सुना:”आ जाओ, मेरी सहेली है, कोइ डरने की बात नहीं. ”

जब अदिति का ड्राइंग रूम में दाखिल हुआ नम्रता उसे देख के भौंचक्की रह गयी- वह तो अदिति का पड़ोसी था !!
नम्रता उसे पहले से जानती थी- अदिति के घर आते जाते दोनों की नज़रें अक्सर एक दूसरे से चार होती थी: वह भी पुलिस में था, शायद हवालदार और नम्रता को घूर-घूर के देखता था, जैसे उसे कच्चा चबा जायेगा, हालाकी नम्रता को इसकी आदत पड़ चुकी थी. ज़्यादातर लड़के उसे ऐसे ही घूरते थे.
नम्रता ने उसपर ज्यादा ध्यान नहीं दिया, फिर भी उसका डील-डौल, रंग रूप उसकी नज़र से बचता नहीं था- वो कम-से-कम छः फुट दो इंच लम्बा, चौड़ा, हट्टा-कट्टा मर्द था. उम्र लगभग छब्बीस-सत्ताईस की रही होगी, रंग किसी अफ्रीकी के जैसा काला, घनी-घनी मूछें.

आज नम्रता उसे ध्यान से देख रही थी. तभी अदिति की आवाज़ ने ध्यान भंग किया ” तुमने शायद इनको पहले भी देखा होगा- ये यहीं बगल में रहते हैं.”
नम्रता औपचारिकता से हलके से मुस्कुरायी और बोली “हाँ..” वो आश्चर्यचकित थी- अदिति का पड़ोसी उम्र में कम से कम उससे छः-सात साल बड़ा होगा, शायद शादी-शुदा भी हो. अदिति का चक्कर इसके साथ कैसे चल रहा है? वो मन ही मन सोच रही थी की तभी अदिति ने परिचय कराया: “ये अनिल हैं, मेरे बगल वाले क्वार्टर में रहते हैं. ”
अनिल नम्रता को पहले की तरह घूर रहा था.
नम्रता की समझ में नहीं आ रहा था की वो क्या कहे. उसने विदा लेना ही ठीक समझा.
वो घर चली आई
अगले दिन कालेज जाते समय रस्ते में नम्रता ने अदिति से सवाल जवाब करना शुरू कर दिया
“क्यूँ री… तेरा उसके साथ कब से चक्कर चल रहा है? मुझे पता तक नहीं?”
अदिति मुस्कुरा दी. “यही कोइ तीन चार महीनों से. तुम्हे बताने ही वाली थी.”
नम्रता ने नक़ल उतारी ” ‘बताने ही वाली थी’… तुम्हे और कोइ नहीं मिला था? वो कितना बड़ा है हम दोनों से… और ऊपर से काला-कलूटा… पूरा राक्षस !”
“तुम बेवक़ूफ़ की बेवक़ूफ़ रहोगी” अदिति मुस्कुराती हुई बोली “मेरा कोइ लव-अफेयर थोड़े चल रहा उसके साथ. बस हम दोनों मस्ती करते हैं”
“हे भगवान… मस्ती करने के लिए भी ऐसा ही मिला था?’ अदिति भौंचक थी.
“क्यूँ, क्या खराबी है उसमे?” अदिति ने पूछा.
“खराबी? बिलकुल काला कलूटा.. डील डौल तो देखो… जैसे डब्लू डब्लू ऍफ़ का पहेलवान हो… और ऊपर से उम्र में कितना बड़ा होगा वो तुमसे?” नम्रता बोली.
अदिति की हंसी निकल गयी. “काले से डर गयी? पागल.. रंग पर मत जा. ऐसे बांका मर्द मैं आज तक नहीं देखा- लम्बा चौड़ा, हट्टा-कट्टा…. उसके साथ मज़ा भी बहुत आता है… बहुत तजुर्बेकार है उस सब में… अभिषेक (अदिति का पुराना बायफ्रेंड, जो अब अजमेर में था) तो उसके सामने फिसड्डी लगता है”
नम्रता अब मुस्कुराती हुई अपनी सहेली की शकल देख रही थी.
“असली मर्द तो मुझे वही लगा, ऐसे दबोचता है की पूछो मत… और उसका ‘वो’ भी बहुत बड़ा है..!!” अदिति ने शैतानी मुस्कान के साथ अपनी बात खत्म की.
नम्रता खींसे निपोरती हुई बोली “चल.. वो तुमसे उम्र कितना बड़ा होगा? उसकी तो शादी भी हो चुकी होगी”.
“उसकी उम्र है सत्ताईस साल, शादीशुदा है और तीन साल के लड़के का बाप भी. और कुछ?”
नम्रता का मुंह खुला रह गया. “हाय… तुम्हे शर्म नहीं आती? और कोइ नहीं मिला था?”
“इसमें शर्म की क्या बात है. कौन सा मुझे उससे शादी करनी है. न मुझे उसके परिवार से कोइ लेना देना है, बस हम दोनों मस्ती कर रहे हैं.” अदिति ने सफाई दी.
“हे भगवान!!” नम्रता के मुह से सिर्फ इतना निकला.
“तुम बेवक़ूफ़ की बेवक़ूफ़ रहोगी. ज़िन्दगी प्रेक्टिकल तरीके से जी जाती है. तुमने उस विक्रांत के ग़म में खाना पीना छोड़ दिया, तुम्हारा वज़न कितना घट गया था.. रात-रात भर रोती रहती थी और वो दूसरी लड़की के साथ घूमता था. कब अकल आयेगी तुम्हे?” अदिति ने सीख दी.
अब नम्रता नाराज़ हो गयी “चुप करो… बहुत मुश्किल से भुला पाई हूँ उस सब को.”
“मुझे मत बताओ.. मैं न संभालती तुम्हे तो अभी तक मर गयी होती.” नम्रता चुप चाप सुनती रही. “और मुझे देखो, उस तगड़े मर्द के साथ जन्नत की सैर कर रही हूँ.. काला कलूटा, एक बच्चे का बाप और शादी शुदा हुआ तो क्या हुआ? मैं तो मस्ती कर रही हूँ और मेरे साथ वो भी.”
नम्रता को पता था की वो अदिति से बहस नहीं कर सकती थी. नम्रता सुंदरी थी, लेकिन बुद्धि में अदिति उससे आगे थी.

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