Namrata Ki Kahani

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rangbaaz 2015-03-20 Comments

इधर अनिल भी नम्रता को करीब से देख रहा था- वैसे तो वो उसे कई बार घूर चुका था, उसके शरीर का अंदाज़ा लगा चुका था, लेकिन आज वो उसके बहुत नज़दीक से देख रहा था- उसके कोमल गुलाबी होट, बड़ी-बड़ी कली-कली आँखें, लम्बी, पतली गर्दन, गोरा चिट्टा रंग, भरी-भरी गोल-गोल चूंचियां (जिनसे उसकी नज़र ही नहीं हट रही थी), इकहरा, मुलायम बदन.

तभी बातों ही बातों में अनिल ने नम्रता का हाथ थाम लिया. नम्रता के शरीर में बिजली दौड़ गयी. “आपका कंगन तो बहुत प्यारा है” अनिल उसकी ब्रेसलेट की तरफ इशारा करते हुए बोला. नम्रता शरमाते हुए बोली “मेरी कज़िन ने दिया है.”

अनिल ने एक ओर अदिति की तरफ देखा, वो समझ गयी. “आप दोनों बातें करिए, मैं चाय लेकर आती हूँ.” इतना कहते ही बेडरूम से बाहर चली गयी. जाते जाते दरवाज़ा भी भेड़ती गयी. अनिल अभी तक नम्रता का हाथ थामे था. उसका काला काला, भरी मरदाना हाथ नम्रता के गोरे गोरे नाज़ुक गुलाबी हाथों से बिलकुल विपरीत रंग का था- बिलकुल कंट्रास्ट. यही कंट्रास्ट दोनों के नंगे शरीर में भी होने वाला था.
वो अब नम्रता से सटकर बैठ गया. दोनों के शरीर छूने लगे. “आपका हाथ कितना प्यारा है, बिलकुल किसी परी के जैसा”
नम्रता पिघली जा रही थी. अनिल को पता चल गया की लोहा गरम है.
उसने अपनी दूसरी बांह नम्रता के कन्धों पर रख ली.
“नम्रता.. तुम बहुत सुन्दर हो” उसने शरमाई हुई नम्रता के चेहरे को उचकाया, दोनों की आँखें मिली- दोनों हवस की आग में जल रहे थे.
“अदिति ने देख लिया तो?”
अनिल हलके से मुस्कुराया और बोला “वो यहाँ नहीं आयेगी, घबराओ मत.” उसने उठ कर बेडरूम के दरवाज़े को अन्दर से बंद कर दिया. बेचारी अदिति का मनोरंजन फुस हो गया.
वापस आकर उसने अपनी बाँहों में समेट लिया. और उसके रसीले होटों पर अपने काले-काले होट रख दिए.
नम्रता कुछ नहीं कर पा रही थी- उस पर ये काला दानव हावी हो रहा था और वो उसे हावी होने दे रही थी- उसे न जाने कितना आनंद आ रहा था अनिल के आगोश में.

अनिल उससे लिपट कर नम्रता के नाज़ुक गुलाबी होटों को चूसने लगा. नम्रता उसकी बाँहों में पिघलने लगी. अनिल ने उसी तरह लिपटे-लिपटे नम्रता के शरीर को सहलाना शुरू किया- उसकी कमर, पीठ, बाहें नम्रता ने अनिल के मजबूत विशाल कन्धों को थाम लिया . फिर धीरे धीरे अनिल के हाथ उस जगह पर पहुंचे जहाँ वो बहुत दिनों से पहुंचना चाह रहे थे- उसकी मुलायम मुलायम चूंचियां. नम्रता ने अब अपने आपको अनिल के हवाले कर दिया था. अनिल के उसके होट चूसते चूसते उसकी चुंचियों को अहिस्ता-अहिस्ता दबाना सहलाना शुरू किया. नम्रता उसके कन्धों को सहला रही थी.

अदिति ये सब चुप चाप बेडरूम के दरवाज़े के पीछे से सुन रही थी.

नम्रता ने उस वक़्त सलवार कुर्ता पहने हुआ था. अभी तक अनिल के हाथ उसके कुर्ते के ऊपर हरकत कर रहे थे. अगले ही पल वो उसके कुर्ते के अन्दर दाखिल हो गए. ” मत करो…” नम्रता ने अपने आप को छुड़ाते हुए नाज़ुक सी आवाज़ में अनिल से गुज़ारिश की. लेकिन अनिल अनुभवी लम्पट था. उसे मालूम था की नम्रता ज़्यादा विरोध नहीं करेगी सिर्फ शर्म से रोक रही थी. वैसे भी उसे इतने इंतज़ार के बाद इतनी सुन्दर लड़की मिली थी. आज तो वोह उसे चोद कर ही छोड़ेगा- पता नहीं फिर मिले न मिले.

उसके होट अनिल के चूसने से लाल हो चुके थे. अनिल ने अनसुना कर दिया और फिर उसे अपनी बाँहों में समेट लिया.
“मेरी जान…” अनिल ने उसके चेहरे और गर्दन पर चूमना शुरू कर दिया. आजतक कभी विक्रांत ने इस अंदाज़ के साथ उसके साथ प्यार नहीं किया था. अभी तक वो दोनों सोफे पर जुटे हुए थे. अनिल उसे बिस्तर पर ले गया और उसे लिटा कर खुद उसके ऊपर लेट गया और उसके होटों को चूसना जारी रखा. नम्रता उसके बोझ से दबी जा रही थी, लेकिन उसे इस दबने में मज़ा आ रहा था.
अनिल ने उसका कुर्ता उतारने की चेष्टा की.
“नहीं, नहीं प्लीज़..” नम्रता ने रोकना चाह, लेकिन अनिल कहाँ सुनने वाला था. उसने झट अन्तरा का कुर्ता ऊपर तक खींच दिया. नम्रता ने अपनी बाहें फैला कर कुर्ते को को उतारने से रोकना चाह लेकिन अनिल ज़बरदस्ती उसका कुर्ता उतर कर कोने में फेंक दिया. एक पल को तो उसके नंगे धड़ को देखता रह गया. उसने गुलाबी रंग की ब्रा पहनी हुई थी जिसके अन्दर उसकी सुन्दर सुन्दर, गोरी गोरी रसगुल्ले जैसी मुलायम चूंचियां कैद थी.
अनिल ने अगले ही पल उसकी सलवार भी उतर दी. लड़कियों को नंगा करने में वो एक्सपर्ट था.
नम्रता ने ब्रा से मेल खाती पैंटी भी पहनी हुई थी.
वो फिर उसके ऊपर चढ़ गया और उसे दबोच कर उसके होटों के रस पीने लगा. अन्तरा को उसकी वर्दी के बिल्ले गड़ रहे थे. अनिल अब उसकी गर्दन को चूम रहा था. वो नम्रता के शरीर पर जहाँ-जहाँ चूमता, वहीँ उसके शरीर में एक बिजली की लहर दौड़ कर पूरे शरीर में फ़ैल जाती, और उसके मुंह से हलकी हलकी सिसकी भी निकलने लगती … “आह्ह्ह… ओह्ह…!!”

न जाने कब नम्रता के हाथ अनिल के बालों को सहलाने लगे थे. वो भी अब अपना सब कुछ अनिल के हवाले करके आनंद के सागर में डूबती जा रही थी. अनिल एक मिनट को नम्रता के ऊपर से उठा और झटपट अपनी पुलिस की वर्दी उतारने लगा. उसका काला, बालदार मांसल शरीर देखकर अन्तरा की चूत में पानी आ गया. अनिल ने अपने पूरे कपड़े उतार दिए, सिवाय चड्ढी के.

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