Paper Dene Aayi Saali, Choot De Gayi



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Deep punjabi 2018-01-16 Comments

हेल्लो दोस्तों आपका अपना दीप पंजाबी एक बार फेर आपकी सेवा में एक नई कहानी लेकर हाज़िर है। ये कहानी मेल के ज़रिये हमारी एक रीडर नेहा द्वारा भेजी गयी है। सो ज्यादा वक्त जाया न करते हुए सीधा कहानी पे आते है।

हलो दोस्तों कैसे हो आप सब ? सबसे पहले तो आपकी अपनी नई दोस्त नेहा गढ़वाल का प्यार भरा नमस्कार कबूल कीजिएगा। कहानी शुरू करने से पहले अपने बारे में विस्तार में बतादूं। मैं पंजाब के जिला बठिंडा की रहने वाली हूँ। मेरी उम्र 30 साल है और शादीशुदा हूँ। मेरे पति अशोक कुमार (32) बिजली विभाग में बतौर लाइनमैन है। हमारा एक 3 साल का बेटा करण भी है।

ये कहानी 2 साल पहले की है। जिसे पढ़कर आप बताना के आपको कहानी केसी लगी और अपने मुझे सुझाव भी मेल करना ।

हुआ यूं के हम दो बहने ही है, अर्थात के हमारा कोई भाई नही है, माता पिता की हम दो ही सन्ताने है। जिनमे मैं बड़ी नेहा और एक छोटी बहन काजल है। मेरी शादी हो चुकी है और छोटी अभी तक कुंवारी है और दसवी कक्षा में पढ़ रही है। मैं अपने पति अशोक के साथ अपने सुसराल में रह रही हूँ।

आप तो जानते ही हो के जीजा साली के रिश्ते में हंसी मज़ाक तो चोली दामन का साथ है। लेकिन हमारी कहानी में हंसी मज़ाक का कुछ और ही रूप बन गया। एक दिन ऐसे ही काजल हमारे घर हमसे मिलने आई । उस वक़्त मैं अपने बेटे करण के साथ घर पे अकेली थी और मेरे पतिदेव अपनी ड्यूटी पे गए हुए थे।

दोपहर का समय होने की वजह से मैं आराम कर रही थी। इतने में डोर बेल की आवाज़ से मेरी नींद टूट गयी और जैसे ही उठकर दरवाज़ा खोला तो सामने मेरी छोटी बहन काजल खड़ी थी। मैंने उसे गले लगाकर उसका स्वागत किया और अंदर बुलाकर वापिस दरवाजा बन्द कर दिया।

उसे सोफे पे बैठने का इशारा करके मैं किचन में उसके लिए पानी लेने चली गयी। उसने पानी पिया और साथ मे बैठकर घर का हाल चाल जाना। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे हैं।

गर्मी का मौसम तो था ही, सो मैंने उसे अपने बेडरूम में जाकर आराम करने को बोला और मैं उसके लिए चाय, खाने का इंतजाम करने लग गयी। करीब 30 मिनट बाद हम दोनों बहने खाने की मेज़ पे थी। दोनों ने मिलकर खाना खाया और बहुत हंसी मज़ाक किया।

काजल — दीदी, आज जीजू कहीं दिख नही रहे, कहाँ गए हैं?

मैं — काजल, वो अपनी डयूटी पे है। बस आते ही होंगे एक आधे घण्टे में।
क्यों कोई काम था क्या ??

काजल — हाँ दीदी, आपके शहर में मेरा एग्जाम सेंटर है। मतलब के आपके शहर के बडे स्कूल में मेरे एग्जाम होंगे। तो रोज़ाना आना जाना बड़ी मुश्किल का काम है। तो माँ ने बोला है के जितने दिन एग्जाम चलेंगे तब तक तुम नेहा के सुसराल में रुक जाना। वहां से तैयार होकर सीधा सेंटर चले जाना, और सेंटर से सीधा घर।

आपको कोई ऐतराज़ तो नही ह न। यदि है तो बतादो अभी वापिस चली जाती हूँ।

मैं — अरे। नही पगली भला मुझे क्या एतराज़ होगा। तुम्हारा अपना घर है। जब दिल करे आओ, जाओ।

अभी हम बाते कर रही रहे थे के करण भी नीद पूरी करके उठ गया और रोने लगा। काजल ने उसे उठाया और उसे चुप कराने लगी। लेकिन करण उससे चुप नही हो रहा था। तो मैंने उससे बेटे को पकड़ कर उसे दूध पिलाने लगी। इतने में डोर बेल बजी।

काजल — आप रुको दीदी, मैं देखती हूँ।

दरवाज़ा खोलते ही सामने अपने जीजू को देखकर उसकी बाछे खिल उठी और उन्हे भी गले लगाकर मिली। दो तीन मिनट तक वो दरवाज़े पे ही बातो में मगन रहे।

मैं — घर के अंदर भी आजो भाई के बाहर ही पूरी बाते करनी है।

इतने में अशोक ने मज़ाकिया मूड में कहा,” भाई साली साहिबा आई है हमारी, कहीं भी रुक कर बाते करे। आपको क्या ??

इसपे हम तीनो हंसने लगे। बेटे को बैड पे लिटाकर मैं उनके लिए किचन में पानी लेने चली गयी। वापिस आकर अशोक को पानी पिलाया और वहीं बैठकर हम तीनो बाते करने लगे।

अशोक — हांजी, तो साली साहिबा, आज कैसे याद आ गयी हमारी ? सब खैरियत तो है, न फोन किया न बताया बस सीधा हल्ला बोल दिया (हाहाहा)

काजल — जीजू, वो बात यह है के आपके शहर में मेरा एग्जाम सेंटर है। माँ ने बोला है के जितने दिन एग्जाम है तुम अपने जीजू के पास चले जाओ। वो तुम्हे ड्यूटी जाते वक़्त सेंटर तक छोड़ दिया करेंगे।

अशोक — (मुझे चिढाने की खातिर) ये तो बढ़िया किया माँ ने, चलो इसी बहाने तुम्हारे साथ वक्त तो गुजार सकूँगा।

इसपे फेर हम तीनो हंस दिए।

शाम को नहा धोकर सबने इकठे खाना खाया। अब समस्या थी के काजल को अलग कैसे सुलाये? क्योंके उसे अकेले सोने में डर लगता है, वो तो अपने घर में भी माँ के साथ सोती है। अपने बेडरूम में तीनो एक बैड पे सो नही सकते थे।

अशोक — ऐसा करो, आप दोनों बहने यहां बेडरूम में सो जाओ मैं दूसरे कमरे गेस्ट रूम में सो जाता हूँ।

उसकी ये बात हमे जच गयी और मैंने उसका बिस्तर अलग कमरे में लगा दिया। जब मैं बिछोना बिछा रही थी तो पीछे से अशोक ने पकड़ कर गालो पे दो तीन पप्पी ले ली और कहा,”आज पहली बार पास होकर भी तुमसे दूर सोना पड़ रहा है।

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