Bhatija Bna Pati – Part 1



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Deep punjabi 2016-08-13 Comments

Sex Stories In Hindi

नमस्कार दोस्तो कैसे हो आप सब उम्मीद है ठीक ही होंगे और देख रहे होंगे आज देसीकहानी डॉट नेट पर किस किस लेखक की नई कहानी आई है?

तो आपकी जिज्ञासा को शांत करते हुए आपका अपना दोस्त दीप पंजाबी एक नई मज़ेदार कहानी लेकर फेर हाज़िर है। लेकिन उस से भी पहले आप सब दोस्तों से एक छोटी सी नराजगी भी है के आप लोगो के मेल पहले से थोड़े कम आ रहे है।

कहानी चाहे बिलकुल पसन्द न आये पर हर पढ़ने वाला पाठक एक मेल जरूर करे और अपने कीमती सुझाव दिया करे। मैं यह बिलकुल नही चाहता हर पढने वाला मेरी कहानी की तारीफ ही करे, चाहे कोई आलोचना भी करे, वो भी मुझे कबूल है।

अब आपका ज्यादा समय बर्बाद न करते हुए सीधा कहानी पे आते है। जो के मध्यप्रदेश के मेरे एक खास दोस्त बन्टी कुमार की आपबीती है। उसने ही अपनी यह आपबीती आप लोगो तक पुहचाने का विचार दिया।

सो आगे की कहानी बंटी की ही ज़ुबानी…

हेल्लो दोस्तों मेरा नाम बन्टी कुमार है मैं मध्यप्रदेश के एक छोटे से गांव से हूँ। मेरी उम्र 27 साल है और मैं एक प्राइवेट कम्पनी में काम करता हूँ।

आपके सामने जो आज कहानी लेकर आया हूँ वो एक साल पहले की घटित घटना है।

जब मैंने पढ़ाई पूरी करके छोड़ी थी और घर पे ही रहकर काम धंधा खोज रहा था। एक दिन मैं काम काज के सिलसिले से पास वाले शहर गया हुआ था। जब दोपहर को घर वापिस आया तो मेरी दूर की रिश्तेदारी मे से एक 35 साल की औरत हमारे घर आई हुई थी।

जो रंग की एक दम सफेद, साढ़े 5 फ़ीट की लम्बाई, एक दम जिम वालो की तरह फिट बॉडी और गौर से देखने पे थोड़ी सी शक्ल अभिनेत्री माधुरी दीक्षित की तरह लगती थी। उस वक़्त मैं उसे नही जानता था।

वो माँ से बाते कर रही थी मैंने उनको नमस्ते बुलाई और अपने कमरे में आराम करने चला गया। वो करीब 2 घण्टे माँ के पास बैठी बाते करती रही। जब वो उठ कर अपने घर गयी तो माँ मुझे चाय देने मेरे कमरे में आई।

मैं — माँ यह औरत कौन थी ?

माँ — क्यों तू इसे नही जानता क्या ?

मैं — हद करते हो आप भी माता जी, यदि पता होता आपसे क्यों पूछता भला ?

माँ — हाँ ये तो है मुझे लगा मज़ाक में पूछ रहा है।

वेसे ये अपने बीकानेर वाले रिश्तेदार राजेन्द्र सिंह की बेटी श्वेता है। जो के तुम्हारी रिश्ते में बुआ लगती है। अब सारा परिवार इसी शहर में रहता है। बेचारी की किस्मत ही खराब है।

आज से 10 साल पहले जब यह कोई 25 साल की होगी तो इसकी शादी राजस्थान के एक गांव के किशन सिंह जोके हाईवे रोड बनाने वाले काम का ठेकेदार था, उस से हुई थी। इन दोनों की पहले दिन से ही आपस में कम ही बनी। आये दिन घर में आने बहाने लड़ाई होती रही। इस दौरान श्वेता दो बच्चों की माँ भी बन गयी पर किशन का स्वभाव न बदला।

जिस से तंग आकर इसने उससे तलाक़ ले लिया और बच्चे भी वहां छोड़ आई। अब अपने माँ बाप के पास ही रहती है। श्वेता बहुत ही काम काज वाली लड़की है। जब तुम बाहर से लौटे तब भी किशन की ही बात कर रही थी।

बुआ की कहानी सुनकर मुझे बहुत धक्का लगा के इसके साथ ऐसा क्यों हो गया। बुआ के प्रति जागी हमदर्दी कब प्यार में बदल गयी पता ही नही चला। एक दिन मैं घर पे अकेला था तो बुआ का आना हुआ। मेने उनका स्वागत किया और उनको चाय पानी पिलाया।

बुआ — बन्टी माजी कहाँ गयी हैं?

मैं– बुआ जी वो तो बाज़ार गए है बस आने ही वाले है। तब तक आप आराम से बैठो।

बुआ ओर मैं आपस में बाते करते रहे। बातो बातो में बुआ ने अपनी आपबीती कहानी सुना दी और ज़ोर ज़ोर से रोने लगी। मेने उन्हें चुप करवाना चाहा पर उनके आंसू रुकने का नाम ही नही ले रहे थे। इतने में माँ भी आ गयी और वो उनसे बाते करने लगी।

इस दौरान कई बार मैं भी उनके घर चला जाता था। थोड़े ही समय में बुआ मुझसे इतना घुल मिल गयी के दोस्त की तरह हर अच्छी बुरी बात शेयर कर लेती थी। वो चाहे 35 की थी पर जिस हिसाब से उसने शरीर को सम्भाला था। वो 25 की भी नही लगती थी। अब बुआ मॉडर्न कपड़े भी पेहनने लगी थी। कभी जीन्स, कभी लेगिंग्स सूट, जिसमे उसके कामुक शरीर को देखकर किसी बूढ़े का भी लण्ड खड़ा हो जाये।

आस पड़ोस के लड़के उसपे खूब लाइन मारते थे, पर बुआ किसी की दाल गलने नही देती थी। कोई भी छोटा बड़ा काम होता मेरे साथ ही बाज़ार जाती थी। क्योंके उसके पापा बज़ुर्ग थे, इतनी भाग दौड़ उनसे नहीं होती थीं।

फेर चाहे बिजली का बिल भरना हो, बच्चों की फीस, या बाज़ार से कुछ लाना हो वो भी बोल देते थे जा बन्टी को साथ लेजा। मेने कई बार नोटीस किया बुआ मेरी कुछ ज्यादा ही क्लोज हो रही है। बुआ अपने घर कम और मेरे घर ज्यादा रहती थी। कई बार मैं भी उनके घर चला जाता था।

जब कई बार बुआ झुककर झाड़ू या पोचा लगाती इसके सफेद मम्मे दिख जाते थे। ये बात उसने भी जान ली थी और शरारती सी स्माइल से हसकर अपना काम करने लगती थी। एक दिन मेरे माँ बापू रिश्तेदारी में गए हुए थे। तो बुआ घर पे आ गयी और हम काफी देर बाते करते रहे।

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