Vidhwa Teacher Ki Chudai – Part 1

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Deep punjabi 2016-08-07 Comments

डॉक्टर ने कहा,” बुखार बहुत ज्यादा है इस लिए इंजेक्शन नही लगा सकता, इसको बुखार उतरने की दवाई दे देता हूँ। घर जाकर दे देना। वैसे आपने बहुत अच्छा किया ये रुमाल भीगो कर इसके सर पे दिया है। इस से इसके दिमाग के बुखार का खतरा कम हो गया है। मैने मन में ही मैडम का धन्यवाद किया और समीर को लेकर सीधा घर आ गया। घर घुसते ही जब समीर के सिर पे भीगा रुमाल बंधा देखकर भाभी (समीर की माँ) अचंभित रह गई और भाग कर पास आई और बोली, क्या हुआ है इसे दीप? तो मैंने सारी कहानी सुना दी।

भाभी ने भी श्वेता मैडम को बहुत दुआए दी। जिस से मैडम के लिए मेरे दिल में बहुत इज़्ज़त और प्यार बढ़ गया। दवाई की वजह से शाम तक थोड़ा बुखार उत्तर गया था और समीर आगन में ही खेल रहा था।

मैंने पास जाकर उससे पूछा,” क्यों जनाब कैसे हो उत्तर गया बुखार क्या आपका? समीर ने पास आकर मुझे जफ्फी में लिया और तोतली सी आवाज़ में बोला,” तातू दाई कोली इ नी थाउगा

(मतलब चाचू दवाई कड़वी है नही खाऊँगा)

मैंने ऊसे गले लगाया और कहा बेटा एक बार ठीक होजा, फेर हम दवा दूर फेंक देंगे।

जिस से वो खुश हो गया और ताली बजाकर हसने लगा।

रात को करीब 9 बजे फेर मैडम का काल आया और समीर की तबियत का पूछा। मैंने थोड़ा ठीक होने का बताया और खास तोर पे धन्यवाद बोला समीर की केयर करने के लिए।

उसने बोला,” धन्यवाद की कोई जरूरत नही है जनाब, एक टीचर की हैसियत से मेरा फ़र्ज़ बनता था। सो मेने तो अपना फ़र्ज़ निभाया है। कोई और मेरी जगह होता वो भी शयद यही करता।

थोड़ी देर इधर उधर की बाते करने के बाद उसने फोन काट दिया।

अगले दिन समीर बिलकुल ठीक था । उसकी माँ ने उसे स्कूल के लिए तैयार कर दिया और मैडम का रुमाल भी धोकर प्रेस करके दिया के मैडम को वापिस दे देना।

जब हम सकूल पहुंचे तो समीर की मैडम आज आई नही थी। मैंने उन्हें काल लगाया तो पता चला उनको बहुत ज्यादा बुखार है और नही आ सकती। मैंने उनका एड्रेस लिया और समीर को वापिस घर छोड़कर उसके घर चला गया। जब बताये पते पे जाकर डोर बैल बजाई तो नाईट ड्रेस में ही मैडम ने दरवाज़ा खोला।

दरवाजा खोलते ही बुखार की वजह से मैडम को चक्र आ गया और गिरने ही वाली थी के भाग कर मैंने उन्हें जफ्फी में ले लिया और गिरने से बचा लिया पर वो बेहोश हो गयी थी, उसका शरीर भी तप रहा था।

उन्हें उठाकर उनके बैड पर लेटा दिया और पास पड़े पानी के गिलास से थोडे पानी से उसके मुँह पे छीटे मारे। जिस से उसको थोड़ा होश आया और मुझे पास बेठा देखकर लेटी हुई बैठने की कोशिश करने लगी, पर उठ न पायी। मैंने उन्हें लेटे रहने का ही इशारा किया और पूछा, कितना बुखार है आपको कोई दवा वगैरा ली या नही आपने।

मोबाइल आपके पास है, काल कर लेते, इतना कष्ट भी झेला ।

इसपे वो बोली,” नही कल देर रात से कपकपी वाला बुखार हुआ है, और उठकर दवा तो दूर कपड़े बदलने की हिम्मत भी नही है। अच्छा हुआ आप आ गए। बैठो आपके लिए चाय बनाती हूँ, पहली बार तो मेरे घर आये हो। जैसे ही उठने लगी फेर गिर गयी। मैंने उन्हें लेटे रहने का बोला और मैं उनकी रसोई का पता करके खुद चाय बनाने चला गया।

करीब 5 मिनट बाद दो कप ट्रे में ले आया और एक कप उनको एक खुद लिया। बाते करते करते उसने बोला यदि आप बुरा न मानो तो मेरे साथ अस्पताल तक जा सकते हो।

मैंने बोला क्यों नही जनाब, एक दोस्त होने के नाते आपकी सेवा करना इस वक़्त फ़र्ज़ है मेरा और कोई मेरी जगह होता वह भी शयद यही करता।

वो बोली, मेरे ही शब्द मुझपे बोल दिए, बड़े बदमाश ओ जी,

मैं — अभी हमारी बदमाशी देखी ही कहाँ है और हम दोनों हसने लगे।

चाय खत्म करके उसे सहारा देकर बाथरूम छोड़ आया। जहां उसने कपड़े बदले और मेरे साथ अस्पताल जाने के लिए तैयार हो गयी।
संयोगवश हम दोनों उसी अस्पताल गए। जहां मैं समीर को दवाई दिलाने एक दिन पहले लेकर गया था।

हम दोनों हम उम्र होने की वजह से डॉक्टर हमे गलतफैमी से पति पत्नी समझ रहा था बोला,” आपकी बीवी को बहुत तेज़ बुखार है। इसके माथे पे गीले कपड़े की पट्टी करो। तब तक मैं दूसरे मरीज़ को देख कर आता हूँ।

इस से पहले मैं डॉक्टर की गलतफैमी दूर करता। वोे हाल में पड़े मरीज़ों को देखने चला गया। मैंने वहां ही रुमाल निकाला और पानी से भिगो कर उसके माथे पे पट्टी करने लगा। जिस से मैडम को थोडा निजात भी मिल रही थी, पर पता नही ऐसा क्या हुआ के मैडम की आँखों में आंसुओ की धारा बहने लगी। मैंने उन्हें पूछा कया हुआ मैडम ?

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