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Arashdeep Kaur 2017-02-02 Comments

हमारे एक शाॅट में ही लंड हमारी चूत की गहराई में उतर गए और हमारा शाॅट इतना जोरदार था कि उन दोनों के मुंह से आहह निकल गई। उनकी आहह सुन कर हमारे अंदर बहुत जोश आया और हम उनके चेहरे पर बूब्ज़ मसलती हुई उनके लंड पर जोर जोर से उछलने लगीं।

हम तो मस्ती में चिल्ला ही रही थीं लेकिन अब वो भी आंहें भरते हुए नीचे से अपनी गांड उठा उठाकर हमें चोदने लगे। मेरी, नीलम, प्रताप और विक्रम की मिलीजुली कामुक आंहों से पूरे कमरे का माहौल बहुत कामुक हो गया। ऐसा लग रहा था जैसे कोई पोर्न मूवी चल रही हो। हमने चूत से लंड निकाला और घूम गईं।

हमने अपने पैर नीचे रखे और उनके लंड पर गांड टिका कर बैठ गईं। हमने अपनी-अपनी गांड को नीचे धकेल दिया और अगले ही पल उनके लंड हमारी गांड की गहराई में सैर-सपाटा करने लगे। हम अपनई गांड को तेज़ी से ऊपर-नीचे करने लगीं और उनके लंड हमारी गांड में आगे-पीछे होने लगे।

इस आसन में हमारे बूब्ज़ भी ऊपर-नीचे उछलते हुए डांस करने लगे और हमने अपने बूब्ज़ को हाथों में पकड़ लिया। मैंने और नीलम ने एक-दूसरे कई तरफ देखा और जगह बदलने का इशारा किया। अब मैं प्रताप की गोद में और नीलम विक्रम की गोद में लंड लेने लगी। हमने फिर वैसे ही चूत एवं गांड चुदाई की।

वो दोनों बैॅड पर एक-दूसरे की तरफ मुंह करके लेट गए और हम भी बैॅड पर आ गईं। उन्होंने हमें बीच लेटने का इशारा किया। मैं प्रताप के आगे और नीलम विक्रम के आगे लेट गई। उन्होंने हमारे चूतडो़ं की फांकें खोलकर लंड गांड में घुसेड़ दिया और मेरी तथा नीलम की चूत को आपस में सटा दिया। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है..

वो हमारे बूब्ज़ को पकड़ कर हमारी गांड चोदने लगे और पीछे से गर्दन पर चुम्मे पर चुम्मा लेने लगे। मैं और नीलम एक-दूसरी के होंठों को चूसते हुए गांड चुदाई का मजा ले रही थीं। जब जब वो हमारी गांड में शाॅट मारते तब तब हम भी गांड को पीछे लंड पर दबा देतीं। अब मेरी गांड में विक्रम का लंड और नीलम की गांड में प्रताप का लंड बांसुरी बजाने लगा। अब मैंने और नीलम ने मुंह विक्रम तथा प्रताप की तरफ कर लिए।

हमने अपने होंठों को उनके होंठों पर रखा और एक एक टांग ऊपर उठा ली। उन्होंने हमारी चूत पर लंड टिकाए और चूत चोदने लगे। इस आसन में हमने बारी बारी दोनों से चूत चुदवाई। जब जब वो हमारी चूत के अंदर लंड पेलते तब तब मेरी और नीलम की गांड आपस में टकरा जाती। आगे से चूत में सख्त लंड और पीछे से नर्म गांड के टकराने से अजीब सी मस्ती आने लगी।

उन्होंने बैॅड से उतर कर दो टेबलों को आमने-सामने लगा दिया और हमें आने को बोला। हमें समझ नहीं आ रही थी कि वो क्या करना चाह रहे हैं और हम वहां चली गईं। उन्होंने हमारी पीठ नीचे लगा कर टांगें ऊपर कर लीं और टेबल के साथ लगा दिया। वो दोनों ने एक टेबल पर अपना धड़ रखा दूसरे पर टांगें और हमारी टांगों के बीच से लेट गए।

उन्होंने हमारी टांगों को पकड़ कर अपने लंड हमारी चूत पर टिका दिए और गांड को नीचे दबा दिया। अगले पल उनके लंड हमारी चूत की गहराई में अठखेलियां करने लगे। हमनें अपनी टांगें उनकी कमर पर लपेट दीं और वो ऊपर से हमें चोदने लगे।

मैं कभी ऐसे नहीं चुदी थी लेकिन ऐसे चुदाई में बहुत मजा आ रहा था। लंड चूत की गहराई में जाकर चुदाई का सुख दे रहा था। वो हमें धड़ल्ले से चोदने लगे और हम ऊंची-ऊंची चिल्लाने लगीं और चुदाई का आनंद लेने लगीं। कुछ देर बाद उन्होंने लंड निकाल लिए और हमें फर्श पर बैठा कर हमारे हाथों में लंड दे दिए।

प्रताप ने मेरे हाथ में और विक्रम ने नीलम के हाथ में लंड दे दिया। हम उनके लंड हिलाकर मुठ मारने लगीं। कुछ देर बाद प्रताप के लंड से वीर्य निकल गया और सीधा मेरे बूब्ज़ पर गिरा। मैंने प्रताप का लंड मुंह में लेकर वीर्य की ऊक एक बूंद निचोड़ ली और चाट कर साफ कर दिया लेकिन विक्रम का लंड अभी भी तना हुआ था। नीलम उसके लंड को चूसने लगी और मैंने उसके अंडकोष मुंह में ले लिए।

थोड़ी देर बाद मैं विक्रम के लंड को चूसने लगी और नीलम उसके अंडकोष को जीभ से चाटने लगी। कुछ देर बाद विक्रम के लंड ने मेरे मुंह में लावा उगल दिया। विक्रम ने आंहें भरते हुए मेरे मुंह में लंड खाली कर दिया। नीलम ने मेरे मुंह पकड़ा और मेरे मुंह में जीभ डालकर विक्रम का वीर्य चाटने लगी।

मैंने उसके मुंह को खोला और आधा वीर्य उसके मुंह में उधेल दिया। उसने जीभ से विक्रम का वीर्य अपने मुंह में घुमाया और निगल गई और जो वीर्य मेरे मुंह में था वो में निगल गई। उसके बाद नीलम मेरे बूब्ज़ से प्रताप का वीर्य चाटने लगी। आधा वीर्य वो साफ कर गई। बाकी वीर्य को वो अपनी जीभ पर लगाती और मेरे पास कर देती। मैं उसकी जीभ को मुंह में लेकर चाट जाती।

कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार निचे कोममेंट सेक्शन में जरुर लिखे.. ताकि देसी कहानी पर कहानियों का ये दोर आपके लिए यूँ ही चलता रहे।

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