Meri Shaadi Shuda Darji Padosan

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Deep punjabi 2017-05-14 Comments

हेलो दोस्तों कैसे हो, पहचाना क्या? टॉप हिन्दी चुदाई कहानी गन्दी कहानिया

इतना भरोसा तो है अपने दोस्तों पे के भूले नही हो और भगवान की कृपा से सब ठीक ही होंगे, पुराने दोस्त तो सब जानते ही है, लेकिन कुछ नए दोस्त भी है उनकी जानकारी के लिये बतादूं, मेरा नाम दीप पंजाबी है और मैं श्री मुक्तसर साहिब पंजाब से हूँ।

एक बार फेर कई महीनो बाद आपकी सेवा में एक नई कहानी लेकर हाज़िर है।

सो ज्यादा इंतज़ार न करवाते हुए सीधा कहानी पे आते है। ये कहानी मेरे एक दोस्त के साथ घटित घटना है और उसी का कहना है के इसे देसी कहानी के चाहने वालो से समक्ष रखा जाये। जिस से दूसरे दोस्त भी लुत्फ़ उठा सके।

तो आगे की कहानी मेरे दोस्त सावन वर्मा की ज़ुबानी…

हलो मित्रो मेरा नाम सावन वर्मा, उम्र करीब 28 वर्ष, बी.ऐ दूसरे साल का स्टूडेंट, राजस्थान किशनगढ़ बास का रहने वाला हूँ, ये कहानी मेरी एक पड़ोसन और मेरे बीच हुए सेक्स के बारे में है। सो उम्मीद है आपको जरूर पसन्द आएगी। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

सबसे पहले तो हमारी कहानी की नायिका यानि के हमारी पड़ोसन पूजा के बारे में बतादूं। वो शादीशुदा है, उसकी उम्र लगभग 28 वर्ष, रंग गेंहुआ, पतली सी कमर वाली लड़की है। लड़की इसलिए बोल रहा हूँ, के उसे देखकर अंदाज़ा भी नही लग सकता के वो दो बच्चों की माँ भी होगी। उसके दो बच्चे एक बेटी और एक बेटा है। हमारे गांव में उसका मायका है। किसी वजह से पिछले साल उसके पति से उसका झगड़ा हो गया और तब से अपने माँ बाप के यहाँ ही रहती है। वो यहां रहकर सिलाई का काम करती है और आस पड़ोस की औरतो और बच्चों के कपड़े सिल्कर अपना और अपने बच्चों का पेट पाल रही है। गांव के बहुत से लड़के उसपे डोरे डालने को तयार बैठे है। लेकिन पूजा किसी को भी घास नही डालती।

एक दिन ऐसे ही मैं अपने कॉलज से वापिस लौटा ही था तो आते ही देखा के मेरे घर पे पूजा और उसके दोनों बच्चे आये हुए थे। मेरी माँ उनके साथ बैठकर बाते कर रही थी।

मेने पास से गुज़रते ही उनको नमस्ते बोला और माँ के साथ बरामदे में ही पड़े खाट पे बैठ गया। माँ उठकर मेरे लिए पानी लेने चली गयी। अब मैं, पूजा और उसके दोनों बच्चे ही बैठे थे। उनके हाथ हसी मज़ाक करने लगा।

वो – और सुनाइए, सावन आपकी पढ़ाई कैसे चल रही है ?

मैं – बहुत बढ़िया जी, आप बताइये आपकी जिंदगी कैसे बसर हो रही है?

शायद मेरा ये सवाल समय की नज़ाकत के हिसाब से सही नही था, फेर भी मेने पूछ ही लिया।

मेरी बात सुनकर उसके चेहरे की हंसी, पता नही कहाँ गायब हो गयी।

एकदम हँसता चेहरा उदास हो गया और आँखों से अश्रुधारा बहने लगी।

जिसे उसने साडी के पल्लू से साफ़ किया लेकिन कुछ भी बोली नही। इतने में मेरी माँ रसोई से मेरे लिए पानी, खाने की थाली लेकर आई। माँ को पास आते देखकर, उसने अपना चेहरा पोंछ लिया और कहा,” सावन आप खाना खालो, बाद में किसी दिन फुरसत में मिलकर बात करेंगे, अब मुझे घर जाना है, काम भी बहुत देने वाला पड़ा है।

पूजा को जाते देखकर माँ बोली,” रुक पूजा किधर जा रही है, बेटा ! आओ तुम भी खाना खाकर जाना और अभी तो आई थी। इतनी भी क्या जल्दी है। थोडा टाइम तो और बैठो।

वो — नही आंटी जी, वो काम देने वाला बहुत पडा है। फेर किसी दिन फुर्सत में आउंगी।

माँ — चलो ठीक है, लेकिन जाती जाती सावन की एक कमीज़ लेती जाना, पता नही कैसेे बटन तोड़ लाया है। अभी जाकर लगा देना, शाम को सावन ले आयेगा, सुबह यही कमीज़ कॉलज जाते वक्त पहननी है।

वो — कोई बात नही आंटी पकड़ा दो, शाम तक बटन लगा दूंगी।

वो मेरी कमीज़ लेकर चली गयी और मैं खाना खाने लगा, लेकिन मेरे दिमाग में एक बात ही खटक रही थी के वो रोई क्यों ??

शाम को मैं बाहर खेलने चला गया। जब वापिस आ रहा था तो याद आया के पूजा से कमीज़ वापिस लेते जानी है।

इसी उलझन तानी में मैं उसकी बैठक में चला गया जहां उसने एक बड़े से बैंच पे सिलाई मशीन रखी हुई थी और खुद कुर्सी पे बैठकर मेरी कमीज़ के बटन लगा रही थी।

मुझे आया देखकर उसने काम वहीं छोड़ दिया और उठकर अंदर से एक और कुर्सी ले आई और मेरी तरफ बढ़ाकर मुझे बैठ जाने का इशारा किया।

मैंने बैठते ही भूमिका बांधते हुए पूछा,'” क्यों पूजा जी बटन लग गए क्या ??

वो – हांजी बस यही आखिर वाला ही लगा रही हूँ, आपको कोई जल्दबाजी तो नही है।

मैं – नही जी, आप आराम से काम करो, लेकिन एक बात समझ में नही आई।

वो – कोनसी ??

मैं – यही के दोपहर को जब मेने आपका हाल पूछा तो आप भावुक क्यों हो गयी थी?

जहां तक मुझे याद है, मेने कुछ गलत नही बोला, सिर्फ आपका हाल ही तो पूछा था।

वो – नही नही ऐसी कोई बात नही थी। बस आपने ज़िन्दगी बसर का पूछा तो मन भर आया के कैसेे पति के होते हुए भी विधवा जैसी ज़िन्दगी जी रही हूँ। अब आप तो अच्छी तरह से समझते हो पति बिना पत्नी का क्या हाल होता है ? यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

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