Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya – Part 17

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iloveall 2017-02-18 Comments

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उनकी नीना के बदन पर गड़ी हुई आँखें और उस समय के उनके चेहरे के लोलुप भाव देखकर मुझे यकीन था की हो न हो मेरा पति अनिल, राज की पत्नी नीना को अपनी आंखोसे नंगी करके के उसके पुरे बदन को मसलने के, उसके साथ सोने के और उसे बड़े चाव से चोदने के सपने निहार रहा था। मुझे कुछ पल के लिए मेरे पति के प्रति घृणा का भाव होने लगा। पर फिर मुझे उस पर दया आ गयी। जब हमने पहली बार शादी का करार किया था तब उसने मुझे स्पष्ट शब्दों में कहा था की वह एक असुधार्य (जो कभी सुधर नहीं सकता ऐसा) कामुक पुरुष था। सेक्स उसकी रग रग में था। ऐसे व्यक्ति से मैं कैसे उम्मीद रखूं की जब मैं उससे सेक्स करने में ज्यादा रूचि न रखूं तो वह इधर उधर तांकझांक नहीं करेगा?

पिछले कुछ महींनों से (या यूँ कहिये की करीब तीन साल से) ऐसा लग रहा था की जैसे मेरे पति अनिल के जीवन में कोई रस रहा ही नहीं था। वह कुछ उखड़ा उखड़ा सा लग रहा था। पर जैसे ही पहली बार उसने नीना को देखा और उस पार्टी में जब उसने नीना के साथ कमर से कमर और जांघ से जांघ रगड़ कर डांस किया तबसे जैसे उसको नया जीवन मिल गया। मैं हैरानगी से मेरे पति के उस परिवर्तन को देखती ही रह गयी।

मुझे इस बात से डर भी लग रहा था की कहीं अनिल उस पागल पन में नीना के साथ कोई ऐसी वैसी हरकत न कर बैठे। उस दावत के बाद घरमें रात को पागलपन में एकाध बार जैसे उसको मुझ पर अचानक ही एकदम ज्यादा प्यार आ गया और वह मुझे नंगी करके मेरे ऊपर चढ़कर मुझे बड़े प्यारसे जोरोंसे चोदने लगा। उसका मुझे चोदने में अचानक इतना रस बढ़गया यह देख कर मैं हैरान हो गयी। पर फिर मैंने अपने आप को एक नसीहत दी की शायद वह मुझे नीना समझ कर ही चोदता होगा, क्योंकि मुझे ऐसा वहम हुआ की एकाध बार मुझे चोदते हुए उन्मादमें उसके मुंहसे “ओह… नीना…” निकल गया था। पर में उस समय आधी नींद में थी और मुझे इस बातका पक्का यकीन नहीं था। मैं यह अनुभव कर रही थी की शायद मेरे पति का ध्यान मुझ पर कम और उस औरत पर ज्यादा होने लगा था।

मेरे लिए यह कोई आश्चर्य की या ज्यादा चिंता की बात नहीं थी। इससे पहले कई बार, मेरा ठर्कु पति कई सुन्दर लड़कियों पर डोरे डाल चूका था और ज्यादातर उसे मुंह की खानी पड़ी थी। एकाध बार जरूर कोई औरत उसे थोड़ी लिफ्ट दे देती थी, पर मेरा बेचारा पति आखिर में उस औरत से भी निराश होकर मेरे ही पास आकर मेरी सेवा में लग जाता था।

शादी के समय मेरी माँ ने मुझे एक सिख दी थी, वह मुझे बराबर याद थी। माँ ने कहा था, “बेटी, यह मर्द जात बन्दर की तरह होती है। कोई सुन्दर बंदरिया देख कर उसको पटाने के लिए वह नाचने गाने लगता है। पर ध्यान रहे, इससे तू घबड़ाना या परेशान मत होना। वह बंदरिया जब तुम्हारे बन्दर (मतलब तुम्हारा पति) को लात मारेगी तो आखिर में वह भागता हुआ, रोता हुआ तुम्हारे पास ही आएगा। बस तू उसका इतना ध्यान रखते रहना की कोई ऐसी बंदरिया उसे न मिल जाय जो उसको उल्लू बनाकर सब लूट ले। शायद मेरी माँ ने मुझे वह सिख अपने अनुभव के आधार पर कही थी।

माँ ने एक बात और भी कही थी की, “हो सकता है की कोई बार तुझे गुस्सा या दुःख भी आए और तेरा अपने पति को कुछ कहने अथवा उसको सबक सिखाने का मन करे। उस समय लड़ाई झगड़ा करने के बजाय, तू बिना कुछ बोले, अपने पति को उसीकी जबान में जवाब देना।” उस समय मैं इसका अर्थ ठीक से नहीं समझ पायी थी की कैसे बिना कुछ बोले मैं अपने पति को उसीकी जबान में जवाब दे सकुंगी?

जब मैंने मेरे पति अनिल को राज की सुन्दर बीबी नीना के साथ कमर रगड़ते हुए डांस करते देखा तो मेरे बदन में एक आग सी लग गयी। नीना सुन्दर जरूर थी। पर मैं भी तो कोई कम सुन्दर नहीं थी। मुझे तब मेरी माँ की सिख समझ में आयी। उसी पार्टी में जब डांस करने के लिए राज ने मेरा हाथ माँगा तो मैं समझ गयी की माँ ने भी तो यही कहा था। मैं भी राज की कमर से कमर रगड़कर डांस करने लगी। मैं मेरे पति को दिखाना चाहती थी की अगर वह किसी पर डोरे डाल सकता है तो मुझ पर भी फ़िदा होने वाले कई हैं।

बेचारा राज! उसका क्या दोष? उसका लन्ड तो उसकी पतलून मैं से बाहर निकल ने को जैसे कूद रहा था। कई बार उसका कड़ा लन्ड मेरी जाँघों से और योनि से टकराया। जब मेरे पति अनिल ने यह देखा तो वह थोड़ा खिसिया सा गया। उसको भी समझ में आ गया की मैं भी कोई कम नहीं हूँ। यह कहानी आप देसी कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है..

पर शायद मेरी रणनीति थोड़ी फीकी रही। उस नीना को देख कर मेरा बन्दर (सॉरी, मेरा पति) अनिल तो जैसे उस पर लटटू होता दिखाई दे रहा था। मैंने पार्टी में देखा तो उसकी नजर बारबार नीना के बड़े मम्मों पर ही केंद्रित लग रही थी। अरे भई! मेरे मम्मे बेर जैसे छोटे थोड़े ही थे? उस समय पार्टी में सारे मर्द मेरे मम्मों को ही तो ताक रहे थे। बल्कि एक औरत ने तो मजाक से कोहनी मार कर मुझे कह भी दिया की आखिरसारे मर्द मेरे मम्मों को ही क्यों ताक रहे थे? अरे जिस औरत पर मेरा पति डोरेड़ाल रहा था, उसी औरत का पति मेरे मम्मों को ऐसे ताक रहा था जैसे वह उन्हें खा ही जाएगा।

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