Badi Mushkil Se Biwi Ko Teyar Kiya – Part 17

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iloveall 2017-02-18 Comments

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तब अचानक राज के हाथ से कुछ छूट कर निचे गिर ने के कारण पाइप में से पानी का फव्वारा छूटा। पानी का जोश इतना तेज था की राज और मैं दोनों ही देखते ही देखते पूरे भीग गए। मेरे हाल तो बिलकुल देखने लायक थे। उस रात को मैं सोने जा रही थी इस लिए मैंने मात्र मेरी नाइटी पहनी थी और अंदर कुछ नहीं पहना था। जब राज आया तो मैंने अपने कंधे पर चुन्नी डाल दी थी, ताकि मैं अपने बड़े स्तनोँ को कुछ हद तक छिपा सकूँ।

पानी के फव्वारे के कारण न सिर्फ मेरी चुन्नी उड़ गयी, बल्कि मेरा पूरा बदन पानी में सराबोर भीग गया, और मेरी पतली नाइटी मेरे बदन पर ऐसे चिपक गयी की ऐसा लग रहा था जैसे मैंने कोई कपडे पहने ही नहीं थे। मेरे पति के ख़ास दोस्त के सामने मैं जैसे नंगी खड़ी हुई थी। लाज से मैं कुछ भी बोलने लायक ही नहीं थी।

कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार निचे कोममेंट सेक्शन में जरुर लिखे.. ताकि देसी कहानी पर कहानियों का ये दोर आपके लिए यूँ ही चलता रहे।

राज का हाल देखते ही बनता था। उसके मुंह पर हवाइयां उड़ रहीं थीं। एक बुद्धू की तरह वह एकटक मेरे स्तनोँ को ताक रहा था। मैंने जब अपनी छाती को देखा तो समझी। मेरी निप्पले साफ़ साफ़ दिख रहीं थीं। ठण्ड और भीगने के कारण मेरी निप्पले खड़ी सख्त होगयी थीं। मेरे सख्त बड़े स्तन जैसे राज को चुनौती दे रहे थे।

मैं जान गयी की अगर मैं थोड़ी देर और वहां उस हाल में खड़ी रही तो मेरी शामत आना तय था। राज की नजरें मेरे बदन को ऐसे तक रही थीं जैसे एक भूखा प्यासा आदमी गरम, स्वादिष्ट और सुगन्धित पकवान को सामने सजाये हुए रखा देख कर ललचाता है।

मेरी जांघें पूरी नंगी दिख रही थीं। मेरी जांघों के बिच का उभार और मेरी योनि की मध्य रेखा पर फैले हलके बाल भी दिख रहे थे। मैं अपने नितम्ब नहीं देख पा रही थी। पर मुझे राज की नजर से पता लग गया था की वह भी उसकी आँखों को ठंडक और लन्ड को तेज गर्मी दे रहे होंगे। अनायास ही मेरी नजर राज के पाँव के बिच गयी। उसने भी पाजामे के निचे कुछ नहीं पहना था। मुझे उसके पाँव के बिच उसका खड़ा लन्ड नजर आया।

मैं कुछ सोचूं उसके पहले राज अपनी जगह से फव्वारे से बचने के लिए खिसका। मेरा पाँव पीछे रखी बाल्टी में फंस जाने की वजह से मैं लुढ़क कर राज पर जा गिरी। मुझे गिरने से रोकने के लिए राज ने अपनी बाँहोंसे मुझे पकड़ लिया और मैं जैसे ही फिसलने लगी तो मुझे कमर से पकड़ कर उठा लिया। पर गीले कपड़ों के कारण उसका हाथ मेरे स्तनों पर जा पहुंचा। स्वभावतः ही उसकी उंगलियां मेरे स्तनों को दबाने को मजबूर हो गयी। है राम, उस समय मेरी निप्पलें दबवाने और सहलवाने के लिए जैसे बेबाक थीं और पुरे अटेंशन में सख्त कड़क थीं। मेरी लंबी निप्पलों को जैसे राज ने ताकत से अपनी उँगलियों में पिचकाया की मैं आधी उन्माद और आधे भय से कराह उठी, “आअह्ह्ह… ओह्ह ….”

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